Rahat Indori Shayari

“राहत इन्दौरी “

 

Rahat Indori Shayari In Hindi | Hindi shayari

राहत का जन्म इंदौर में 1 जनवरी 1950 में कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के यहाँ हुआ। वे उन दोनों की चौथी संतान हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की[2] और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालयभोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया।[3] तत्पश्चात 1985 में मध्य प्रदेश के मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

वह  एक भारतीय उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के गीतकार हैं।[1] वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रह चुके हैं।

हाल ही में उनकी एक मुख्तर बहोत परषिद हुई ! जो इस प्रकार है

 


बुलाती है मगर जाने का नहीं , 

बुलाती है मगर जाने का नहीं , 

ये दुनिया है ..

इधर जाने का नहीं


 

तोह  आइये उनके कुछ मशहूर शेर व शायरी से रूबरू होते हैं |

और अपनी मनपंसद शायरी को अपने दोस्तों और चाहने वालों को शेयर करते हैं  whatsapp or social media पर !

 

RAHAT INDORI SHAYARI

 

Rahat Indori Shayari In Hindi | Hindi shayari


जुबा  तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो दे..

में कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे !

तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढाव ,

में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे…


 


हर  एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं ,

आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं ,

मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया !

मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं….


 


जवानिओं  में जवानी को धुल करते हैं ,

जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं ,

अगर अनारकली हैं सबब बगावत का !

सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते है …


 


इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए ,

तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए ,

फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर!

गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए…


 

RAHAT INDORI SHAYARI

 


रोज़  तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं ,

चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता हैं ..

उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो ,

धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं….


 


आग  के पास कभी मोम को लाकर देखूं  ,

हो इज़ाज़त तो तुझे हाथ लगाकर देखूं ,

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है!

सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगाकर देखूं…


 


चेहरों  के लिए आईने कुर्बान किये हैं ,

इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं ,​

महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​ ,

जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है…


 

 

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